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श्लोक 3.19.5  |
गदायामपविद्धायां हाहाकारे विनिर्गते ।
मानयामास तद्धर्मं सुनाभं चास्मरद्विभु: ॥ ५ ॥ |
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| अनुवाद |
| जब भगवान् की गदा ज़मीन पर गिरी और देखने वाले देवताओं और ऋषियों के समूह में हाहाकार मच गया, तब भगवान् ने उस असुर की धर्मपरायणता की सराहना की और इसके बाद उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र का आह्वान किया। |
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| जब भगवान् की गदा ज़मीन पर गिरी और देखने वाले देवताओं और ऋषियों के समूह में हाहाकार मच गया, तब भगवान् ने उस असुर की धर्मपरायणता की सराहना की और इसके बाद उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र का आह्वान किया। |
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