Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 3.19.4: यद्यपि हिरण्याक्ष को अपने निःशस्त्र शत्रु पर बिना किसी बाधा के प्रहार करने का उत्तम अवसर मिल गया था, फिर भी उसने द्वंद्व युद्ध के नियम का सम्मान किया और इस प्रकार परमेश्वर श्रीकृष्ण के क्रोध को भड़का दिया।   |   bhagavat अध्याय 3.19: असुर हिरण्याक्ष का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 19: असुर हिरण्याक्ष का वध  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.19.4 
स तदा लब्धतीर्थोऽपि न बबाधे निरायुधम् ।
मानयन् स मृधे धर्मं विष्वक्सेनं प्रकोपयन् ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि हिरण्याक्ष को अपने निःशस्त्र शत्रु पर बिना किसी बाधा के प्रहार करने का उत्तम अवसर मिल गया था, फिर भी उसने द्वंद्व युद्ध के नियम का सम्मान किया और इस प्रकार परमेश्वर श्रीकृष्ण के क्रोध को भड़का दिया।
 
Although Hiranyaksha had a golden opportunity to attack his unarmed enemy without any hindrance, he respected the rules of war, which would increase the fury of the Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)