| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 3: यथास्थिति » अध्याय 19: असुर हिरण्याक्ष का वध » श्लोक 34 |
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| | | | श्लोक 3.19.34  | अन्येषां पुण्यश्लोकानामुद्दामयशसां सताम् ।
उपश्रुत्य भवेन्मोद: श्रीवत्साङ्कस्य किं पुन: ॥ ३४ ॥ | | | | | | अनुवाद | | यदि मनुष्य चाहें तो अमर यश वाले भक्तों के काम-धंधों को सुनकर भी आनंद प्राप्त कर सकते हैं, तो श्रीवत्सधारी श्री भगवान की लीलाओं के श्रवण का तो कहना ही क्या! | | | | यदि मनुष्य चाहें तो अमर यश वाले भक्तों के काम-धंधों को सुनकर भी आनंद प्राप्त कर सकते हैं, तो श्रीवत्सधारी श्री भगवान की लीलाओं के श्रवण का तो कहना ही क्या! | | ✨ ai-generated | | |
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