| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 3: यथास्थिति » अध्याय 19: असुर हिरण्याक्ष का वध » श्लोक 25 |
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| | | | श्लोक 3.19.25  | तं मुष्टिभिर्विनिघ्नन्तं वज्रसारैरधोक्षज: ।
करेण कर्णमूलेऽहन् यथा त्वाष्ट्रं मरुत्पति: ॥ २५ ॥ | | | | | | अनुवाद | | तब वह असुर भगवान को कठोर घूँसों से पीटने लगा किन्तु भगवान अधोक्षज ने उसकी कनपटी में थप्पड़ मारा, जैसे कि मरुतों के स्वामी इन्द्र ने राक्षस वृत्र को मारा था। | | | | तब वह असुर भगवान को कठोर घूँसों से पीटने लगा किन्तु भगवान अधोक्षज ने उसकी कनपटी में थप्पड़ मारा, जैसे कि मरुतों के स्वामी इन्द्र ने राक्षस वृत्र को मारा था। | | ✨ ai-generated | | |
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