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श्लोक 3.19.23  |
तदा दिते: समभवत्सहसा हृदि वेपथु: ।
स्मरन्त्या भर्तुरादेशं स्तनाच्चासृक् प्रसुस्रुवे ॥ २३ ॥ |
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| अनुवाद |
| उसी पल हिरण्याक्ष की माँ दिति के दिल में अचानक एक सिहरन दौड़ गई। उसे अपने पति कश्यप के कहे हुए शब्द याद आ गए और उसके स्तनों से खून बहने लगा। |
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| उसी पल हिरण्याक्ष की माँ दिति के दिल में अचानक एक सिहरन दौड़ गई। उसे अपने पति कश्यप के कहे हुए शब्द याद आ गए और उसके स्तनों से खून बहने लगा। |
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