श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 19: असुर हिरण्याक्ष का वध  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.19.23 
तदा दिते: समभवत्सहसा हृदि वेपथु: ।
स्मरन्त्या भर्तुरादेशं स्तनाच्चासृक् प्रसुस्रुवे ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
उसी पल हिरण्याक्ष की माँ दिति के दिल में अचानक एक सिहरन दौड़ गई। उसे अपने पति कश्यप के कहे हुए शब्द याद आ गए और उसके स्तनों से खून बहने लगा।
 
उसी पल हिरण्याक्ष की माँ दिति के दिल में अचानक एक सिहरन दौड़ गई। उसे अपने पति कश्यप के कहे हुए शब्द याद आ गए और उसके स्तनों से खून बहने लगा।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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