श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 19: असुर हिरण्याक्ष का वध  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.19.22 
प्रादुष्कृतानां मायानामासुरीणां विनाशयत् ।
सुदर्शनास्त्रं भगवान् प्रायुङ्क्त दयितं त्रिपात् ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
तब यज्ञों के फल भोगने वाले प्रभु श्रीहरि ने अपना प्रिय सुदर्शन चक्र छोड़ा जो असुर के दिखाए समस्त जादुई जालों और शक्तियों को नष्ट करने में सक्षम था।
 
तब यज्ञों के फल भोगने वाले प्रभु श्रीहरि ने अपना प्रिय सुदर्शन चक्र छोड़ा जो असुर के दिखाए समस्त जादुई जालों और शक्तियों को नष्ट करने में सक्षम था।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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