श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 19: असुर हिरण्याक्ष का वध  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.19.21 
बहुभिर्यक्षरक्षोभि: पत्त्यश्वरथकुञ्जरै: ।
आततायिभिरुत्सृष्टा हिंस्रा वाचोऽतिवैशसा: ॥ २१ ॥
 
 
अनुवाद
अत्यंत क्रूर और असभ्य नारे यक्षों और राक्षसों के आततायी समूहों द्वारा लगाए जा रहे थे, जो या तो पैदल चल रहे थे या घोड़ों, हाथियों या रथों पर सवार थे।
 
Groups of Yaksha and Rakshasa terrorists, many of whom were either on foot or riding on horses, elephants or chariots, were shouting extremely cruel and vulgar slogans.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)