| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 3: यथास्थिति » अध्याय 19: असुर हिरण्याक्ष का वध » श्लोक 20 |
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| | | | श्लोक 3.19.20  | गिरय: प्रत्यदृश्यन्त नानायुधमुचोऽनघ ।
दिग्वाससो यातुधान्य: शूलिन्यो मुक्तमूर्धजा: ॥ २० ॥ | | | | | | अनुवाद | | हे निर्विकार विदुर, पहाड़ों से अनेक प्रकार के अस्त्र-शस्त्र निकलने लगे और त्रिशूल धारण किये हुए निर्वस्त्र राक्षसिनियाँ खुले बालों के साथ उभर आईं। | | | | हे निर्विकार विदुर, पहाड़ों से अनेक प्रकार के अस्त्र-शस्त्र निकलने लगे और त्रिशूल धारण किये हुए निर्वस्त्र राक्षसिनियाँ खुले बालों के साथ उभर आईं। | | ✨ ai-generated | | |
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