श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 19: असुर हिरण्याक्ष का वध  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.19.2 
तत: सपत्नं मुखतश्चरन्तमकुतोभयम् ।
जघानोत्पत्य गदया हनावसुरमक्षज: ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मा जी के नथुने से प्रकट हुए भगवान उछल पड़े और अपने सामने निर्भयता से विचर रहे अपने असुर शत्रु, हिरण्याक्ष की ठोड़ी पर उन्होंने अपनी गदा से प्रहार किया।
 
ब्रह्मा जी के नथुने से प्रकट हुए भगवान उछल पड़े और अपने सामने निर्भयता से विचर रहे अपने असुर शत्रु, हिरण्याक्ष की ठोड़ी पर उन्होंने अपनी गदा से प्रहार किया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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