तत: सपत्नं मुखतश्चरन्तमकुतोभयम् ।
जघानोत्पत्य गदया हनावसुरमक्षज: ॥ २ ॥
अनुवाद
ब्रह्मा जी के नथुने से प्रकट हुए भगवान उछल पड़े और अपने सामने निर्भयता से विचर रहे अपने असुर शत्रु, हिरण्याक्ष की ठोड़ी पर उन्होंने अपनी गदा से प्रहार किया।
The Lord, emanating from Brahmā's nostrils, sprang up and struck with His mace the chin of His demon enemy, Hiranyaksha, who was walking fearlessly before Him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)