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श्लोक 3.19.17  |
अथोरुधासृजन्मायां योगमायेश्वरे हरौ ।
यां विलोक्य प्रजास्त्रस्ता मेनिरेऽस्योपसंयमम् ॥ १७ ॥ |
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| अनुवाद |
| किन्तु असुर ने योगेश्वर श्रीभगवान् पर अनेक भ्रमात्मक चालें चलीं। यह देखकर सभी लोग भयभीत हो उठे और सोचने लगे कि ब्रह्माण्ड का विनाश आसन्न है। |
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| किन्तु असुर ने योगेश्वर श्रीभगवान् पर अनेक भ्रमात्मक चालें चलीं। यह देखकर सभी लोग भयभीत हो उठे और सोचने लगे कि ब्रह्माण्ड का विनाश आसन्न है। |
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