श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 19: असुर हिरण्याक्ष का वध  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.19.16 
तेनेत्थमाहत: क्षत्तर्भगवानादिसूकर: ।
नाकम्पत मनाक् क्‍वापि स्रजा हत इव द्विप: ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
हे विदुर, असुर द्वारा इस प्रकार चोट लगने पर भी प्राकट्य रूप में आए वराह भगवान के शरीर का कोई अंग तनिक भी नहीं हिला जैसे मानो किसी हाथी पर फूलों की माला से प्रहार किया गया हो।
 
हे विदुर, असुर द्वारा इस प्रकार चोट लगने पर भी प्राकट्य रूप में आए वराह भगवान के शरीर का कोई अंग तनिक भी नहीं हिला जैसे मानो किसी हाथी पर फूलों की माला से प्रहार किया गया हो।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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