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bhagavat 3.19.11: जब प्रभु ने गदा को अपनी ओर आते देखा, तो वह उसी स्थान पर अविचलित होकर खड़े रहे और उसे सहजता से ऐसे पकड़ लिया, जैसे पक्षियों का राजा गरुड़ सर्प को पकड़ लेता है।   |   bhagavat अध्याय 3.19: असुर हिरण्याक्ष का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 19: असुर हिरण्याक्ष का वध  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.19.11 
तां स आपततीं वीक्ष्य भगवान् समवस्थित: ।
जग्राह लीलया प्राप्तां गरुत्मानिव पन्नगीम् ॥ ११ ॥
 
 
अनुवाद
जब प्रभु ने गदा को अपनी ओर आते देखा, तो वह उसी स्थान पर अविचलित होकर खड़े रहे और उसे सहजता से ऐसे पकड़ लिया, जैसे पक्षियों का राजा गरुड़ सर्प को पकड़ लेता है।
 
When the Lord saw the mace coming toward Him, He stood firmly at the same place and effortlessly caught it just as the king of birds, Garuda, catches a serpent.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)