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bhagavat 3.19.10: तब भगवान ने कहा, "अपना हथियार उठाओ और अगर तुम मुझ पर विजय प्राप्त करने के लिए उत्सुक हो, तो फिर से प्रयास करो।" इन शब्दों से चुनौती मिलने पर, राक्षस ने भगवान पर अपना गदा चलाया और फिर से जोर से गर्जना की।   |   bhagavat अध्याय 3.19: असुर हिरण्याक्ष का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 19: असुर हिरण्याक्ष का वध  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.19.10 
आह चायुधमाधत्स्व घटस्व त्वं जिगीषसि ।
इत्युक्त:स तदा भूयस्ताडयन् व्यनदद् भृशम् ॥ १० ॥
 
 
अनुवाद
तब भगवान ने कहा, "अपना हथियार उठाओ और अगर तुम मुझ पर विजय प्राप्त करने के लिए उत्सुक हो, तो फिर से प्रयास करो।" इन शब्दों से चुनौती मिलने पर, राक्षस ने भगवान पर अपना गदा चलाया और फिर से जोर से गर्जना की।
 
Then the Lord said, “Take up your weapon and try again if you are willing to defeat me.” Challenged by these words, the demon aimed his mace at the Lord and roared loudly again.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)