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श्लोक 3.18.27  |
अधुनैषोऽभिजिन्नाम योगो मौहूर्तिको ह्यगात् ।
शिवाय नस्त्वं सुहृदामाशु निस्तर दुस्तरम् ॥ २७ ॥ |
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| अनुवाद |
| अभिजित नाम से विख्यात विजय के लिए अति उत्तम मुहूर्त मध्याह्न से प्रारंभ होकर समाप्ति के करीब है; अत: अपने मित्रों व शुभचिंतकों के हित में आप इस भयंकर शत्रु का त्वरित निपटारा करें। |
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| अभिजित नाम से विख्यात विजय के लिए अति उत्तम मुहूर्त मध्याह्न से प्रारंभ होकर समाप्ति के करीब है; अत: अपने मित्रों व शुभचिंतकों के हित में आप इस भयंकर शत्रु का त्वरित निपटारा करें। |
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