श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 18: भगवान् वराह तथा असुर हिरण्याक्ष के मध्य युद्ध  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.18.27 
अधुनैषोऽभिजिन्नाम योगो मौहूर्तिको ह्यगात् ।
शिवाय नस्त्वं सुहृदामाशु निस्तर दुस्तरम् ॥ २७ ॥
 
 
अनुवाद
अभिजित नाम से विख्यात विजय के लिए अति उत्तम मुहूर्त मध्याह्न से प्रारंभ होकर समाप्ति के करीब है; अत: अपने मित्रों व शुभचिंतकों के हित में आप इस भयंकर शत्रु का त्वरित निपटारा करें।
 
अभिजित नाम से विख्यात विजय के लिए अति उत्तम मुहूर्त मध्याह्न से प्रारंभ होकर समाप्ति के करीब है; अत: अपने मित्रों व शुभचिंतकों के हित में आप इस भयंकर शत्रु का त्वरित निपटारा करें।
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd