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bhagavat 3.18.26: हे मेरे स्वामी, संसार को आच्छादित अत्यन्त घोर अँधेरा शीघ्र ही घटित होने वाला है। चूंकि आप सभी प्राणियों की आत्मा हैं, इसलिए कृपया उनका वध करके देवताओं को विजयी बनाएँ।   |   bhagavat अध्याय 3.18: भगवान् वराह तथा असुर हिरण्याक्ष के मध्य युद्ध   ।   bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 18: भगवान् वराह तथा असुर हिरण्याक्ष के मध्य युद्ध  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.18.26 
एषा घोरतमा सन्ध्या लोकच्छम्बट्करी प्रभो ।
उपसर्पति सर्वात्मन् सुराणां जयमावह ॥ २६ ॥
 
 
अनुवाद
हे मेरे स्वामी, संसार को आच्छादित अत्यन्त घोर अँधेरा शीघ्र ही घटित होने वाला है। चूंकि आप सभी प्राणियों की आत्मा हैं, इसलिए कृपया उनका वध करके देवताओं को विजयी बनाएँ।
 
O Lord, the dark evening hour that will envelop the world is approaching. Since You are the Soul of all souls, Please kill it and make the Gods victorious.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)