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bhagavat 3.18.14: क्रोध से भरकर, अपने पूरे अस्तित्व पर आवेश हावी होने के साथ, राक्षस तेजी से प्रभु पर लपका और अपनी शक्तिशाली गदा से उन पर वार किया।   |   bhagavat अध्याय 3.18: भगवान् वराह तथा असुर हिरण्याक्ष के मध्य युद्ध   ।   bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 18: भगवान् वराह तथा असुर हिरण्याक्ष के मध्य युद्ध  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.18.14 
सृजन्नमर्षित: श्वासान्मन्युप्रचलितेन्द्रिय: ।
आसाद्य तरसा दैत्यो गदयान्यहनद्धरिम् ॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
क्रोध से भरकर, अपने पूरे अस्तित्व पर आवेश हावी होने के साथ, राक्षस तेजी से प्रभु पर लपका और अपनी शक्तिशाली गदा से उन पर वार किया।
 
The demon, hissing and trembling in rage, immediately fell upon the Lord and attacked Him with his powerful mace.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)