श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 18: भगवान् वराह तथा असुर हिरण्याक्ष के मध्य युद्ध  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.18.10 
श्रीभगवानुवाच
सत्यं वयं भो वनगोचरा मृगा
युष्मद्विधान्मृगये ग्रामसिंहान् ।
न मृत्युपाशै: प्रतिमुक्तस्य वीरा
विकत्थनं तव गृह्णन्त्यभद्र ॥ १० ॥
 
 
अनुवाद
भगवान बोले- सच में, हम जंगल के जीव हैं और हम तुम जैसे ही शिकारी कुत्तों का पीछा कर रहे हैं। जो मृत्यु के फँदों से मुक्त हो चुका है, उसे तुम्हारे ढोंग भरे बकवास से कुछ भी भय नहीं है, क्योंकि तुम मृत्यु के बंधनों में जकड़े हुए हो।
 
भगवान बोले- सच में, हम जंगल के जीव हैं और हम तुम जैसे ही शिकारी कुत्तों का पीछा कर रहे हैं। जो मृत्यु के फँदों से मुक्त हो चुका है, उसे तुम्हारे ढोंग भरे बकवास से कुछ भी भय नहीं है, क्योंकि तुम मृत्यु के बंधनों में जकड़े हुए हो।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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