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श्लोक 3.17.6  |
उद्धसत्तडिदम्भोदघटया नष्टभागणे ।
व्योम्नि प्रविष्टतमसा न स्म व्यादृश्यते पदम् ॥ ६ ॥ |
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| अनुवाद |
| आकाश के तारों को काले बादलों ने ढँक लिया था, और कभी-कभी बिजली की चमक दिखाई देती थी मानो तेज हँसी आ रही हो। चारों ओर अँधेरा फैला हुआ था और कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। |
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| आकाश के तारों को काले बादलों ने ढँक लिया था, और कभी-कभी बिजली की चमक दिखाई देती थी मानो तेज हँसी आ रही हो। चारों ओर अँधेरा फैला हुआ था और कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। |
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