स एवमुत्सिक्तमदेन विद्विषा
दृढं प्रलब्धो भगवानपां पति: ।
रोषं समुत्थं शमयन् स्वया धिया
व्यवोचदङ्गोपशमं गता वयम् ॥ २९ ॥
अनुवाद
इस अत्यंत दंभी शत्रु द्वारा इस प्रकार उपहास किए जाने पर जल के पूज्य स्वामी को क्रोध तो आया किंतु तर्क के बल पर उन्होंने उस क्रोध को पी लिया और इस प्रकार उत्तर दिया - हे प्रिय, युद्ध के लिए अत्यधिक बूढ़ा हो जाने के कारण अब मैं युद्ध से दूर रहता हूँ।
The revered lord of water became angry when he was ridiculed in this manner by a very arrogant enemy, but by the power of logic he swallowed that anger and replied thus: O beloved, as I am too old for war, I now stay away from war.
तात्पर्य
जैसे हम देखते हैं, उग्रवादी भौतिकवादी हमेशा बिना कारण के लड़ाई खड़ी करते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥