श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 17: हिरण्याक्ष की दिग्विजय  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.17.19 
चक्रे हिरण्यकशिपुर्दोर्भ्यां ब्रह्मवरेण च ।
वशे सपालाँल्लोकांस्त्रीनकुतोमृत्युरुद्धत: ॥ १९ ॥
 
 
अनुवाद
तीनों लोकों में सबसे बड़ा पुत्र हिरण्यकशिपु किसी से भी अपनी मौत से नहीं डरता था क्योंकि उसे भगवान ब्रह्मा का आशीर्वाद प्राप्त था। इस आशीर्वाद के कारण वो बहुत ही बड़ा अहंकारी बन गया था और तीनों लोकों को अपने वश में करने में सफल हो गया था।
 
तीनों लोकों में सबसे बड़ा पुत्र हिरण्यकशिपु किसी से भी अपनी मौत से नहीं डरता था क्योंकि उसे भगवान ब्रह्मा का आशीर्वाद प्राप्त था। इस आशीर्वाद के कारण वो बहुत ही बड़ा अहंकारी बन गया था और तीनों लोकों को अपने वश में करने में सफल हो गया था।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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