जीवात्माओं की सृष्टि करने वाले कश्यप जी ने अपने जुड़वाँ बेटों को नाम दिया। वह जो पहले जन्मा, उसका नाम हिरण्याक्ष रखा और वह जो दिति द्वारा पहले गर्भ में धारण किया गया, उसका नाम हिरण्यकशिपु रखा।
Kashyap, the creator of living entities, named his twin sons. He named the one who was born first, Hiranyaksha, and the one Diti conceived first, Hiranyakashipu.
तात्पर्य
वैदिक ग्रंथों में पिण्डसिद्धि नामक एक प्रमाणिक साहित्य है जिसमें गर्भावस्था की वैज्ञानिक समझ बहुत ही अच्छी तरह से वर्णित है। उसमें बताया गया है कि जब पुरुष का वीर्य दो बार एक के बाद एक करके गर्भ मासिक निर्गमन में प्रवेश करता है, तो माता के गर्भ में दो भ्रूण विकसित होते हैं, और वह जुड़वाँ बच्चों को जन्म देती है, पर वह उस क्रम में नहीं जन्म लेते जिस क्रम में धारण किए जाते हैं; जो बच्चा पहले धारण किया जाता है बाद में जन्म लेता है और जो बाद में धारण किया जाता है पहले जन्म लेता है। जो बच्चा गर्भ में पहले धारण किया जाता है वह दूसरे बच्चे के पीछे होता है, इसलिए जन्म के समय दूसरा बच्चा पहले प्रकट होता है और पहला बच्चा दूसरा। इस मामले में यह समझा जाता है कि हिरण्याक्ष जो कि दूसरा बच्चा था, पहले जन्म लेता है, जबकि हिरण्यकश्यप, जो कि उसके पीछे वाला बच्चा था और पहले धारण किया गया था, वह बाद में जन्म लेता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥