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श्लोक 3.17.16  |
तावादिदैत्यौ सहसा व्यज्यमानात्मपौरुषौ ।
ववृधातेऽश्मसारेण कायेनाद्रिपती इव ॥ १६ ॥ |
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| अनुवाद |
| पुराने ज़माने में आए ये दोनों असुर कुछ ही समय में अपनी असाधारण शारीरिक विशेषताओं के लिए जाने जाने लगे थे; उनके शरीर इस्पात की तरह कड़े थे और वो दो बड़े पहाड़ों की तरह बढ़ने लगे थे। |
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| पुराने ज़माने में आए ये दोनों असुर कुछ ही समय में अपनी असाधारण शारीरिक विशेषताओं के लिए जाने जाने लगे थे; उनके शरीर इस्पात की तरह कड़े थे और वो दो बड़े पहाड़ों की तरह बढ़ने लगे थे। |
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