श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 15: ईश्वर के साम्राज्य का वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.15.5 
नमो विज्ञानवीर्याय माययेदमुपेयुषे ।
गृहीतगुणभेदाय नमस्तेऽव्यक्तयोनये ॥ ५ ॥
 
 
अनुवाद
हे बल और विज्ञानमय ज्ञान के मूल स्रोत, आपको नमस्कार है। आपने भगवान से अलग हुए जुनून के रूप को स्वीकार किया है। बाहरी ऊर्जा की मदद से आप अप्रकट स्रोत से उत्पन्न हुए हैं। आपको नमस्कार है।
 
O original source of power and scientific knowledge, salutations to you. You have accepted the mode of passion separated from the Lord. You are born from the unmanifested source with the help of external energy. Salutations to you.
तात्पर्य
वेद ही समझ के सभी विभागों के लिए मूल वैज्ञानिक ज्ञान हैं, और वेदों का ये ज्ञान पहले परमेश्वर व्यक्तित्व ने ब्रह्मा के हृदय में प्रत्यारोपित किया था। इसलिए ब्रह्मा ही सभी वैज्ञानिक ज्ञान के मूल स्रोत हैं। उनका जन्म सीधे गर्भोदकाशाही विष्णु के दिव्य शरीर से हुआ है, जिन्हें इस भौतिक ब्रह्मांड के किसी भी जीव ने कभी नहीं देखा है और इसलिए हमेशा प्रकट नहीं रहते हैं। ब्रह्मा का यहाँ जन्म अनावश्यक होने के कारण बताया गया है। वे भौतिक प्रकृति में जोश के अवतार हैं, जो सर्वोच्च भगवान की अलग, बाहरी ऊर्जा है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)