जब भगवान के चरणों से तुलसी के पत्तों की सुगंध लेकर आने वाली कोमल हवा उन ऋषियों के नथुनों तक पहुंची, तो उनके शरीर और मन दोनों में बदलाव का अनुभव हुआ, यद्यपि वे निर्विशेष ब्रह्म ज्ञान के प्रति आसक्त थे।
When the gentle wind carrying the fragrance of tulasi leaves from the toes of the Lord's lotus feet entered the nostrils of those sages, although they were attached to the knowledge of impersonal Brahman, they experienced a change in both body and mind.
तात्पर्य
इस श्लोक से यह प्रतीत होता है कि चारों कुमार निराकारवादी थे या अद्वैतवाद के समर्थक थे, जो ईश्वर के साथ एक हो जाते थे। लेकिन जैसे ही उन्होंने भगवान के रूप को देखा, उनका मन बदल गया। दूसरे शब्दों में, निराकारवादी जो भगवान के साथ एक होने के प्रयास में पारलौकिक आनंद महसूस करता है, वह तब पराजित होता है जब वह भगवान के सुंदर पारलौकिक रूप को देखता है। उनके कमल चरणों की सुगंध की वजह से, जो हवा में फैलती है और तुलसी की सुगंध के साथ मिलती है, उनका मन बदल गया; परमेश्वर के साथ एक होने के बजाय, उन्होंने भक्त होना बुद्धिमानी समझा। भगवान के कमल चरणों का सेवक बनना, भगवान का साथी बनने से बेहतर है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥