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bhagavat 3.15.41: उनका चेहरा गालों से बढ़ाया जा रहा था, जो उनके मगरमच्छ के आकार की बालियों की सुंदरता को बढ़ा रहे थे, जो बिजली से भी तेज थे। उनकी नाक बड़ी थी और उनका सिर रत्न जड़ित मुकुट से ढका हुआ था। उनकी मजबूत भुजाओं के बीच एक आकर्षक हार लटका हुआ था, और उनकी गर्दन में कौस्तुभ मणि से अलंकृत थी।   |   bhagavat अध्याय 3.15: ईश्वर के साम्राज्य का वर्णन   ।   bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 15: ईश्वर के साम्राज्य का वर्णन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  3.15.41 
विद्युत्क्षिपन्मकरकुण्डलमण्डनार्ह-
गण्डस्थलोन्नसमुखं मणिमत्किरीटम् ।
दोर्दण्डषण्डविवरे हरता परार्ध्य-
हारेण कन्धरगतेन च कौस्तुभेन ॥ ४१ ॥
 
 
अनुवाद
उनका चेहरा गालों से बढ़ाया जा रहा था, जो उनके मगरमच्छ के आकार की बालियों की सुंदरता को बढ़ा रहे थे, जो बिजली से भी तेज थे। उनकी नाक बड़ी थी और उनका सिर रत्न जड़ित मुकुट से ढका हुआ था। उनकी मजबूत भुजाओं के बीच एक आकर्षक हार लटका हुआ था, और उनकी गर्दन में कौस्तुभ मणि से अलंकृत थी।
 
His face was highlighted by cheeks which enhanced the beauty of His lightning-like Makara-shaped earrings. His nose was high and His head was covered with a jeweled crown. An enchanting necklace hung between His strong arms and His neck was adorned with the Kaustubha gem.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)