पीतांशुके पृथुनितम्बिनि विस्फुरन्त्या
काञ्च्यालिभिर्विरुतया वनमालया च ।
वल्गुप्रकोष्ठवलयं विनतासुतांसे
विन्यस्तहस्तमितरेण धुनानमब्जम् ॥ ४० ॥
अनुवाद
वे पीले वस्त्र के बड़े कूल्हे भाग पर चमचमाती करधनी से सजे थे। उनको माला सुंदरता प्रदान कर रही थी, जो गूंजते भौंरों द्वारा पहचानी जा रही थी। उनकी सुन्दर कलाईयों पर सुशोभित कंगन थे, और उन्होंने अपने वाहक गरुड़ के कंधे पर एक हाथ रखा हुआ था और दूसरे हाथ से कमल का फूल घुमा रहे थे।
He was adorned with a girdle which glittered on the yellow cloth that covered His ample hips. He wore a garland of fresh flowers, which was marked by buzzing bees. His beautiful wrists were adorned with bracelets and He rested one hand on the shoulder of His vehicle Garuda and with the other hand He was twirling a lotus flower.
तात्पर्य
यहाँ साधु-संतों द्वारा व्यक्तिगत रूप से अनुभव किए गए भगवान की दैवीय सत्ता का संपूर्ण वर्णन दिया गया है। भगवान के व्यक्तिगत शरीर पर पीले वस्त्र थे, और उनकी कमर पतली थी। वैकुंठ में, जब भी भगवान के व्यक्तित्व या उनके किसी सहयोगी के सीने पर फूलों की माला होती है, तो उस पर भिनभिनाते हुए मधुमक्खियों को दिखाया जाता है। ये सभी विशेषताएँ भक्तों के लिए बहुत ही सुंदर और आकर्षक थीं। भगवान के एक हाथ उनके वाहन गरुड़ पर टिका हुआ था, और दूसरे हाथ में उन्होंने कमल का फूल घुमाया था। ये भगवान नारायण के व्यक्तित्व के लक्षण हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥