मत्तद्विरेफवनमालिकया निवीतौ
विन्यस्तयासितचतुष्टयबाहुमध्ये ।
वक्त्रं भ्रुवा कुटिलया स्फुटनिर्गमाभ्यां
रक्तेक्षणेन च मनाग्रभसं दधानौ ॥ २८ ॥
अनुवाद
दोनों द्वारपालों के गले में और उनके चारों नीले हाथों के बीच ताजा फूलों की माला पड़ी हुई थी जो कि मदहोश भौरों को अपनी ओर खींच रही थी। उनकी घुमावदार भौहें, असंतुष्ट नथुने और लाल आँखें देखकर लग रहा था कि वे कुछ परेशान हैं।
The two gatekeepers wore garlands of fresh flowers, which attracted the maddened bumblebees and were around their necks and between their four blue arms. They appeared somewhat agitated with their crooked eyebrows, unsatisfied nostrils and red eyes.
तात्पर्य
इनके हार फूलों की माला थे, इसलिये मधुमक्खी के झुंड इनके इर्द-गिर्द भिनभिनाते ही रहते थे। वैकुण्ठलोक में सब कुछ नया, ताजा और पारलौकिक है। वैकुण्ठ के निवासियों का शरीर नीला होता है तथा चार हाथ होते हैं, जैसे नारायण के।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥