यह बहुत ही खेदजनक है कि दुर्भाग्यशाली लोग वैकुण्ठलोक के बारे में चर्चा नहीं करते हैं, बल्कि ऐसे विषयों में लगे रहते हैं जो सुनने लायक नहीं हैं और जो मनुष्य की बुद्धि को भ्रमित करते हैं। जो लोग वैकुण्ठ के विषयों को त्यागकर भौतिक दुनिया की बातें करते हैं, उन्हें अज्ञान के सबसे गहरे अंधेरे में फेंक दिया जाता है।
It is very sad that unfortunate people do not talk about the Vaikuntha planets, but engage in topics that are not worth listening to and confuse the human intellect. Those who abandon the topics of Vaikuntha and talk about the material world are thrown into the deepest darkness of ignorance.
तात्पर्य
अधिकतम दुर्भाग्यपूर्ण व्यक्ति अवैयक्तिकवादी हैं, जो आध्यात्मिक दुनिया की अलौकिक विविधता को समझ नहीं सकते। वे वैकुंठ ग्रहों की सुंदरता के बारे में बात करने से डरते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि विविधता भौतिक होनी चाहिए। ऐसे अवैयक्तिकवादी सोचते हैं कि आध्यात्मिक दुनिया पूरी तरह से शून्य है, या दूसरे शब्दों में, कि कोई विविधता नहीं है। इस मानसिकता को यहाँ कु-कथा मति-घनीः, "अयोग्य शब्दों से परेशान बुद्धि" के रूप में वर्णित किया गया है। शून्यता और आध्यात्मिक दुनिया की अवैयक्तिक स्थिति के दर्शन की यहाँ निंदा की जाती है क्योंकि वे बुद्धि को भ्रमित करते हैं। अवैयक्तिकवादी और शून्य दार्शनिक इस भौतिक दुनिया के बारे में कैसे सोच सकते हैं, जो विविधता से भरी हुई है और फिर कह सकते हैं कि आध्यात्मिक दुनिया में कोई विविधता नहीं है? ऐसा कहा जाता है कि यह भौतिक दुनिया आध्यात्मिक दुनिया का विकृत प्रतिबिंब है, इसलिए जब तक आध्यात्मिक दुनिया में विविधता नहीं है, तब तक भौतिक दुनिया में अस्थायी विविधता कैसे हो सकती है? कोई व्यक्ति इस भौतिक दुनिया को पार कर सकता है इसका मतलब यह नहीं है कि कोई पारलौकिक विविधता नहीं है। यहाँ भागवतम में, विशेष रूप से इस श्लोक में, इस बात पर बल दिया गया है कि जो लोग आध्यात्मिक आकाश और वैकुंठों की वास्तविक आध्यात्मिक प्रकृति की चर्चा और समझने की कोशिश करते हैं, वे भाग्यशाली हैं। वैकुंठ ग्रहों की विविधता का वर्णन भगवान के पारलौकिक कालक्रमों के संबंध में किया गया है। लेकिन भगवान के आध्यात्मिक निवास और आध्यात्मिक गतिविधियों को समझने की कोशिश करने के बजाय, लोगों की राजनीति और आर्थिक विकास में अधिक रुचि है। वे इस सांसारिक स्थिति की समस्याओं को हल करने के लिए कई सम्मेलन, बैठकें और चर्चा करते हैं, जहाँ वे केवल कुछ साल रह सकते हैं, लेकिन वे वैकुंठ दुनिया की आध्यात्मिक स्थिति को समझने में रुचि नहीं रखते हैं। यदि वे भाग्यशाली हैं, तो वे घर वापस जाने, भगवान के पास वापस जाने में रुचि रखते हैं, लेकिन जब तक वे आध्यात्मिक दुनिया को नहीं समझते हैं, वे लगातार इस भौतिक अंधकार में सड़ते जाते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥