श्री रूपिणी क्वणयती चरणारविन्दं
लीलाम्बुजेन हरिसद्मनि मुक्तदोषा ।
संलक्ष्यते स्फटिककुड्य उपेतहेम्नि
सम्मार्जतीव यदनुग्रहणेऽन्ययत्न: ॥ २१ ॥
अनुवाद
वैकुण्ठलोक की स्त्रियाँ इतनी सुंदर हैं जैसे स्वयं देवी लक्ष्मी हों। ऐसी दिव्य सुंदरियाँ, जिनके हाथ कमलों से खेलते हैं और पैरों के नूपुर बजते हैं, कभी-कभी संगमरमर की दीवारों को, जो कि सुनहरी सीमाओं से सजी हुई हैं, इस उद्देश्य से झाड़ू लगाती देखी जा सकती हैं कि उन्हें परमेश्वर का अनुग्रह प्राप्त हो सके।
The women of the Vaikunthaloka are as beautiful as the goddess Lakshmi herself. Such divine beauties, with their hands playing with lotuses and anklets tinkling on their feet, are sometimes seen sweeping the marble walls, which are decorated with golden borders at regular intervals, so that they may receive the blessings of the Lord.
तात्पर्य
ब्रह्म संहिता में कहा गया है कि भगवान गोविंद को उनके निवास पर हमेशा बहुत-बहुत अरबों देवियाँ भाग्य की सेवित करती हैं। लक्ष्मी-सहस्र-शत-सम्भ्रम-सेवमानम। वैकुण्ठ लोक में रहनेवाली ये खरबों और अरबों देवियाँ भाग्य इसमें ठीक तरह से परमेश्वर के पत्नी नहीं होती, बल्कि वे परमेश्वर के भक्तों की पत्नियाँ होती हैं और वे भी परमेश्वर की सेवा में लिप्त रहती हैं। यहाँ कहा गया है कि वैकुंठ लोक में घर संगमरमर के बने हुए हैं। इस प्रकार ब्रह्म संहिता में यह भी कहा गया है कि वैकुंठ लोक में ज़मीन स्पर्श पत्थर की बनी हुई है। इस प्रकार वैकुंठ में पत्थर पर झाड़ू लगाने की कोई आवश्यकता नहीं होता, क्योंकि वहाँ बहुत ही कम धूल होती है, पर फिर भी, परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए वहाँ की औरतें हमेशा संगमरमर की दीवारों पर धूल झाड़ने का काम करती हैं। क्यों? इसका कारण यह है कि ऐसा करने से वे परमेश्वर का आशीर्वाद पाने के लिए उत्सुक रहती हैं। यहाँ यह भी कहा गया है कि वैकुंठ लोक में भाग्य की देवियाँ निष्कलंकपूर्ण होती हैं। सामान्यतः भाग्य की देवी एक जगह पर स्थिर नहीं रहती। उसका नाम चंचला है, जिसका मतलब होता है "वे जो स्थिर नहीं रहती।" इस प्रकार हम देखते हैं कि एक आदमी जो बहुत अमीर होता है वह सबसे ज़्यादा गरीब हो सकता है। दूसरा उदाहरण रावण है। रावण लक्ष्मी को, सीता जी को अपने राज्य में ले गया, और लक्ष्मी के कृपा से खुश होने के बजाय, उसका परिवार और राज्य पराजित हो गया। इस प्रकार रावण के घर में लक्ष्मी चंचला, या स्थिर नहीं थी। रावण के प्रकार के पुरुष केवल लक्ष्मी को चाहते हैं, उसके पति नारायण के बिना; इसलिए वे लक्ष्मी जी की वजह से स्थिर नहीं रह पाते हैं। भौतिकवादी व्यक्ति लक्ष्मी की ओर से गलती पाते हैं, पर वैकुंठ में लक्ष्मी जी परमेश्वर की सेवा में स्थापित है। भाग्य की देवी होने के बावजूद भी, वह परमेश्वर की कृपा के बिना खुश नहीं रह सकती है। भाग्य की देवी को भी खुश होने के लिए परमेश्वर की कृपा की आवश्यकता पड़ती है, पर फिर भी भौतिक संसार में ब्रह्मा भी, सबसे बड़े बनाए गए इंसान, खुशी के लिए लक्ष्मी का पक्ष लेते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥