वैकुण्ठ के धाम में निवासी अपनी विमानों में अपनी पत्नियों और प्रेमिकाओं के साथ यात्रा करते हैं और भगवान के चरित्र और कार्यों का शाश्वत रूप से गुणगान करते हैं, जो हमेशा सभी अशुभ गुणों से परे रहते हैं। भगवान की महिमा का गान करते हुए वे सुगंधित और शहद से भरे हुए खिले हुए मधवी फूलों की उपस्थिति का भी उपहास करते हैं।
The inhabitants of the Vaikunthaloka fly in their aircrafts with their wives and lovers and eternally sing praises of the character and activities of the Lord, who is always devoid of all inauspicious qualities. While singing the glories of the Lord, they even ridicule the presence of the blooming madhavi flowers, which are fragrant and full of honey.
तात्पर्य
इस श्लोक से ऐसा प्रतीत होता है कि वैकुण्ठ ग्रह सभी प्रकार के ऐश्वर्य से भरे हुए हैं। वहाँ विमान हैं जिनमें निवासी अपने प्रिय के साथ आध्यात्मिक आकाश में यात्रा करते हैं। वहाँ एक हवा है जो खिलते हुए फूलों की खुशबू लाती है और यह हवा इतनी प्यारी है कि यह फूलों का शहद भी लाती है। वैकुण्ठ के निवासी, हालाँकि, भगवान की महिमा करने में इतने रुचि रखते हैं कि वे भगवान की महिमा का जप करते समय इतनी प्यारी हवा की गड़बड़ी को पसंद नहीं करते हैं। दूसरे शब्दों में, वे शुद्ध भक्त हैं। वे भगवान की महिमा को अपनी इंद्रिय तृप्ति से अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं। वैकुण्ठ ग्रहों पर इंद्रिय तृप्ति का कोई प्रश्न नहीं है। एक खिलते हुए फूल की खुशबू सूंघना निश्चित रूप से बहुत अच्छा है, लेकिन यह केवल इंद्रिय तृप्ति के लिए है। वैकुण्ठ के निवासी भगवान की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं, न कि अपनी इंद्रिय तृप्ति को। भगवान की सेवा में प्रेम में ऐसा दिव्य आनंद मिलता है कि तुलना में इंद्रिय तृप्ति की गिनती नगण्य के रूप में की जाती है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥