त एकदा भगवतो वैकुण्ठस्यामलात्मन: ।
ययुर्वैकुण्ठनिलयं सर्वलोकनमस्कृतम् ॥ १३ ॥
अनुवाद
इस प्रकार समस्त ब्रह्मांडों की यात्रा करने के पश्चात वे आध्यात्मिक आकाश में भी प्रविष्ट हुए, क्योंकि वे संपूर्ण भौतिक कल्मषों से मुक्त थे। आध्यात्मिक आकाश में अनेक आध्यात्मिक ग्रह हैं, जिन्हें वैकुंठ कहा जाता है, जो परम पुरुष भगवान और उनके शुद्ध भक्तों का निवास-स्थान है और सम्पूर्ण भौतिक ग्रहों के निवासियों द्वारा पूजे जाते हैं।
After thus traveling through all the universes, He also entered the spiritual sky, because He was free from all material contamination. In the spiritual sky there are various spiritual planets, called Vaikunthas, which are the abode of the Supreme Personality of Godhead and His pure devotees and are worshiped by the inhabitants of all the material planets.
तात्पर्य
भौतिक संसार चिंताओं और व्यग्रताओं से भरा हुआ है। किसी भी ग्रह पर, सर्वोच्च से निम्नतम पाताल तक, प्रत्येक जीवित प्राणी को चिंताओं और व्यग्रताओं से भरा होना ही चाहिए क्योंकि भौतिक ग्रहों पर कोई भी शाश्वत रूप से नहीं रह सकता है। हालाँकि, जीवित संस्थाएँ वास्तव में शाश्वत हैं। वे एक शाश्वत घर, एक शाश्वत निवास चाहते हैं, लेकिन भौतिक संसार में एक अस्थायी निवास स्वीकार करने के कारण, वे स्वाभाविक रूप से चिंता से भरे हुए हैं। आध्यात्मिक आकाश में ग्रहों को वैकुण्ठ कहा जाता है क्योंकि इन ग्रहों के निवासी सभी चिंताओं से मुक्त हैं। उनके लिए जन्म, मृत्यु, बुढ़ापे और बीमारियों का कोई प्रश्न नहीं है, और इसलिए वे चिंतित नहीं हैं। दूसरी ओर, भौतिक ग्रहों के निवासी हमेशा जन्म, मृत्यु, बीमारी और बुढ़ापे से डरते रहते हैं, और इसलिए वे चिंताओं से भरे हुए हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥