अन्तर्बहिश्चामलमब्जनेत्रं
स्वपूरुषेच्छानुगृहीतरूपम् ।
पौत्रस्तव श्रीललनाललामं
द्रष्टा स्फुरत्कुण्डलमण्डिताननम् ॥ ५० ॥
अनुवाद
तुम्हारा पोता, अंदर और बाहर दोनों जगह, उन सर्वोच्च व्यक्तित्व भगवान के दर्शन कर सकेगा जिनकी पत्नी लक्ष्मीजी हैं। भगवान भक्त द्वारा इच्छित किसी भी रूप को धारण कर सकते हैं और उनका चेहरा हमेशा कुंडलों से सुंदर ढंग से सजा रहता है।
Your grandson will be able to see the Supreme Personality of Godhead from within and outside, whose wife is the beautiful goddess Lakṣmī. The Lord can assume any form desired by the devotee, and His face is always beautifully adorned with earrings.
तात्पर्य
यह प्रतीक है कि दिति के पोते प्रहलाद महाराज न केवल भगवान के व्यक्तित्व को ध्यान में देख सकेंगे बल्कि उसे अपनी आँखों से देख सकेंगे| यह सीधा दृश्य संभव है केवल उसी के लिए जो कृष्ण भावना में अत्यंत उन्नत हो, क्योंकि भगवान को भौतिक आँखों से नहीं देखा जा सकता है| भगवान के व्यक्तित्व के कई प्रकार के शाश्वत रूप हैं जैसे कृष्ण, बलदेव, संकर्षण, अनिरुद्ध, प्रद्युम्न, वसुदेव, नारायण, राम, नृसिंह, वराह और वामन, और भगवान के भक्त उन सभी विष्णु रूपों को जानते हैं| एक पाकभक्त भगवान के एक शाश्वत रूप से जुड़ जाता है, और भगवान उसे इच्छा के रूप में प्रकट करने में आनंदित होते हैं| एक भक्त भगवान के रूप के बारे में कुछ सनकी कल्पना नहीं करता है, और न ही वह कभी सोचता है कि भगवान अवैयक्तिक है और एक अविश्वासी द्वारा वांछित रूप ले सकता है| एक अविश्वासी को भगवान के रूप का कोई विचार नहीं है, और इस तरह वह ऊपर बताए गए रूपों में से किसी के बारे में नहीं सोच सकता है| पर जब भी एक भक्त भगवान को देखता है, वह उसे सबसे सुंदर ढंग से सजाए गए रूप में देखता है, उनकी निरंतर साथी भाग्य की देवी के साथ होती है, जो शाश्वत रूप से सुंदर है|
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥