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bhagavat 3.14.44-45: विद्वान कश्यप ने कहा: तुम्हारे शोक, पश्चाताप और उचित विचार-विमर्श के कारण और पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान में तुम्हारी अटूट आस्था और भगवान शिव और मेरे प्रति तुम्हारी आराधना के कारण भी, तुम्हारे पुत्र (हिरण्यकशिपु) का एक पुत्र (प्रह्लाद) भगवान द्वारा स्वीकृत भक्त होगा और उसकी प्रसिद्धि भगवान के समान ही प्रसारित होगी।   |   bhagavat अध्याय 3.14: संध्या समय दिति का गर्भ-धारण   ।   bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 14: संध्या समय दिति का गर्भ-धारण  »  श्लोक 44-45
 
 
श्लोक  3.14.44-45 
कश्यप उवाच
कृतशोकानुतापेन सद्य: प्रत्यवमर्शनात् ।
भगवत्युरुमानाच्च भवे मय्यपि चादरात् ॥ ४४ ॥
पुत्रस्यैव च पुत्राणां भवितैक: सतां मत: ।
गास्यन्ति यद्यश: शुद्धं भगवद्यशसा समम् ॥ ४५ ॥
 
 
अनुवाद
विद्वान कश्यप ने कहा: तुम्हारे शोक, पश्चाताप और उचित विचार-विमर्श के कारण और पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान में तुम्हारी अटूट आस्था और भगवान शिव और मेरे प्रति तुम्हारी आराधना के कारण भी, तुम्हारे पुत्र (हिरण्यकशिपु) का एक पुत्र (प्रह्लाद) भगवान द्वारा स्वीकृत भक्त होगा और उसकी प्रसिद्धि भगवान के समान ही प्रसारित होगी।
 
The learned Kasyapa said: Because of your grief, repentance and proper conversation and also because of your unwavering faith in the Supreme Personality of Godhead and your praise of Lord Shiva and me, your son (Hiranyakashipu) will have a son (Prahlada) who will be approved by the Lord and his fame will be as famous as that of the Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)