श्रद्दधानाय भक्ताय ब्रूहि तज्जन्मविस्तरम् ।
ऋषे न तृप्यति मन: परं कौतूहलं हि मे ॥ ४ ॥
अनुवाद
मेरा मन बहुत ही जिज्ञासु हो गया है, इसलिए भगवान के प्रकट होने की कथा सुनकर मुझे सन्तोष नहीं हो रहा है। इसलिए, कृपया इस श्रद्धालु भक्त से और अधिक कहें।
My mind has become extremely curious, therefore I am not satisfied with hearing the story of the manifestation of the Lord. Therefore, please tell this devoted devotee more.
तात्पर्य
जो वास्तव में श्रद्धालु और जिज्ञासु हैं, वे ईश्वर के अवतरण और लुप्ति के आध्यात्मिक लीलाओं को सुनने के योग्य हैं। विदुर ऐसे आध्यात्मिक संदेश प्राप्त करने के लिए उपयुक्त उम्मीदवार थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥