श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 14: संध्या समय दिति का गर्भ-धारण  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  3.14.36 
स न: प्रसीदतां भामो भगवानुर्वनुग्रह: ।
व्याधस्याप्यनुकम्प्यानां स्त्रीणां देव: सतीपति: ॥ ३६ ॥
 
 
अनुवाद
वे हम पर प्रसन्न हों, क्योंकि वे मेरी बहन सती के पति, मेरे बहनोई हैं। और सभी महिलाओं के लिए आराध्य होने के साथ-साथ वे समस्त ऐश्वर्यों के व्यक्ति हैं। वे उन स्त्रियों के प्रति दयालु हो सकते हैं, जिन्हें असभ्य शिकारी भी क्षमा कर देते हैं।
 
वे हम पर प्रसन्न हों, क्योंकि वे मेरी बहन सती के पति, मेरे बहनोई हैं। और सभी महिलाओं के लिए आराध्य होने के साथ-साथ वे समस्त ऐश्वर्यों के व्यक्ति हैं। वे उन स्त्रियों के प्रति दयालु हो सकते हैं, जिन्हें असभ्य शिकारी भी क्षमा कर देते हैं।
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