श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 14: संध्या समय दिति का गर्भ-धारण  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  3.14.36 
स न: प्रसीदतां भामो भगवानुर्वनुग्रह: ।
व्याधस्याप्यनुकम्प्यानां स्त्रीणां देव: सतीपति: ॥ ३६ ॥
 
 
अनुवाद
वे हम पर प्रसन्न हों, क्योंकि वे मेरी बहन सती के पति, मेरे बहनोई हैं। और सभी महिलाओं के लिए आराध्य होने के साथ-साथ वे समस्त ऐश्वर्यों के व्यक्ति हैं। वे उन स्त्रियों के प्रति दयालु हो सकते हैं, जिन्हें असभ्य शिकारी भी क्षमा कर देते हैं।
 
May he be pleased with us, for he is my brother-in-law, the husband of my sister Sati. He is also the worshipped deity of all women. He is the personification of all opulences and can show kindness to women which even uncivilized hunters forgive.
तात्पर्य
भगवान शिव साती के पति हैं, जो दिति की बहनों में से एक हैं। दिति ने अपनी बहन साती की प्रसन्नता का आह्वान किया ताकि साती अपने पति से उसे माफ करने का अनुरोध करे। इसके अलावा, भगवान शिव सभी महिलाओं के पूजनीय देव हैं। वह स्वाभाविक रूप से महिलाओं के प्रति बहुत दयालु हैं, जिन पर असभ्य शिकारी भी अपनी दया दिखाते हैं। चूंकि भगवान शिव स्वयं महिलाओं से जुड़े हुए हैं, इसलिए वह उनकी दोषपूर्ण प्रकृति को अच्छी तरह से जानते हैं, और वह दिति के अपरिहार्य अपराध को बहुत गंभीरता से नहीं ले सकते हैं, जो उसके दोषपूर्ण स्वभाव के कारण हुआ था। हर कुंवारी लड़की को भगवान शिव की भक्त माना जाता है। दिति को बचपन में भगवान शिव की पूजा याद आई और उन्होंने उनकी दया की भीख मांगी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)