श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 14: संध्या समय दिति का गर्भ-धारण  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.14.34 
दितिरुवाच
न मे गर्भमिमं ब्रह्मन् भूतानामृषभोऽवधीत् ।
रुद्र: पतिर्हि भूतानां यस्याकरवमंहसम् ॥ ३४ ॥
 
 
अनुवाद
सुन्दर दिति ने कहा : हे ब्राह्मण, कृपया ध्यान रखें कि समस्त प्राणियों के स्वामी भगवान् शिव मेरे इस गर्भ को नष्ट न कर दें, क्योंकि मैंने उनके विरुद्ध महान अपराध किया है।
 
The beautiful Diti said: O Brahmin, please ensure that this pregnancy of mine is not destroyed by Lord Shiva, the Lord of all living beings, because I have committed a great offense against him.
तात्पर्य
दिति अपने अपराध के प्रति सचेत थी और भगवान शिव द्वारा माफ़ किए जाने के लिए व्याकुल थी। भगवान शिव के दो लोकप्रिय नाम हैं, रुद्र और आशुतोष। वह बहुत आसानी से क्रोधित होते हैं और साथ ही साथ जल्दी शांत भी हो जाते हैं। दिति जानती थी कि उनके जल्दी क्रोधित हो जाने के कारण, वह उस गर्भावस्था को नष्ट कर सकते हैं जिसे उसने अवैध तरीके से हासिल किया था। लेकिन क्योंकि वह आशुतोष भी थे, इसलिए उन्होंने अपने ब्राह्मण पति से भगवान शिव को शांत करने में मदद करने का अनुरोध किया, क्योंकि उनके पति भगवान शिव के एक महान भक्त थे। दूसरे शब्दों में, भगवान शिव दिति से नाराज़ हो सकते थे क्योंकि उसने अपने पति को कानून का उल्लंघन करने के लिए बाध्य किया, लेकिन वह उसके पति की प्रार्थना को अस्वीकार नहीं करेंगे। इसलिए माफी के लिए आवेदन उसके पति के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। उन्होंने भगवान शिव से इस प्रकार प्रार्थना की।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)