श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 14: संध्या समय दिति का गर्भ-धारण  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.14.19 
यामाहुरात्मनो ह्यर्धं श्रेयस्कामस्य मानिनि ।
यस्यां स्वधुरमध्यस्य पुमांश्चरति विज्वर: ॥ १९ ॥
 
 
अनुवाद
हे आदरणीया, पत्नी इतनी मददगार होती है कि उसे मनुष्य के शरीर की अर्धांगिनी कहा जाता है, क्योंकि वह सभी शुभ कार्यों में साथ देती है। पुरुष अपनी पत्नी को सारी ज़िम्मेदारियाँ सौंपकर निश्चिंत होकर घूम सकता है।
 
हे आदरणीया, पत्नी इतनी मददगार होती है कि उसे मनुष्य के शरीर की अर्धांगिनी कहा जाता है, क्योंकि वह सभी शुभ कार्यों में साथ देती है। पुरुष अपनी पत्नी को सारी ज़िम्मेदारियाँ सौंपकर निश्चिंत होकर घूम सकता है।
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