तद्भवान्दह्यमानायां सपत्नीनां समृद्धिभि: ।
प्रजावतीनां भद्रं ते मय्यायुङ्क्तामनुग्रहम् ॥ ११ ॥
अनुवाद
इसलिए आपको मुझ पर पूरी दया करके मुझ पर कृपा करनी चाहिए। मैं संतान चाहती हूं और अपनी सौतन का ऐश्वर्य देखकर मैं बहुत दुखी हूं। यह कार्य करने से आप सुखी हो जाएंगे।
Therefore you should be kind to me by showing complete mercy towards me. I want to have a son and I am very distressed seeing the wealth of my co-wives. By doing this act you will be happy.
तात्पर्य
भगवद गीता में बच्चे पैदा करने के लिए संभोग को धर्मसम्मत माना गया है। हालाँकि, साधारण इन्द्रियतृप्ति के लिए यौन प्रवृत्ति वाला व्यक्ति अधर्मी होता है। दिति की अपने पति से सेक्स की अपील में यह बिल्कुल नहीं था कि वह सेक्स इच्छाओं से पीड़ित थी, बल्कि वह बेटों की चाहत रखती थी। चूँकि उसके कोई पुत्र नहीं था, इसलिए वह अपनी सह-पत्नियों से अधिक गरीब महसूस करती थी। इसलिए कश्यप को अपनी प्रामाणिक पत्नी को संतुष्ट करना था।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥