दितिरुवाच
एष मां त्वत्कृते विद्वन् काम आत्तशरासन: ।
दुनोति दीनां विक्रम्य रम्भामिव मतङ्गज: ॥ १० ॥
अनुवाद
उस स्थान पर रूपवती दिति ने अपनी कामना प्रकट की- हे पंडित, कामदेव अपने बाण लेकर मुझे उसी तरह बलपूर्वक सता रहा है जैसे कि पागल हाथी केले के पेड़ को हिलाकर परेशान करता है।
At that place the beautiful Diti expressed her desire: O learned one, Cupid, with his arrows, is tormenting me with force, just as a mad elephant shakes a banana tree.
तात्पर्य
सुन्दरी दिति ने अपने पति को समाधि में लीन देख ज़ोर से बोलना शुरू किया, शारीरिक इशारों द्वारा उनका ध्यान आकर्षित करने की कोशिश नहीं की। उसने स्पष्ट रूप से कहा कि पति की मौजूदगी के कारण उसका पूरा शरीर कामवासना से व्याकुल है, जैसे एक केले के पेड़ को एक मदमस्त हाथी परेशान करता है। समाधि में होने पर अपने पति को परेशान करना उसके स्वभाव के ख़िलाफ़ था, लेकिन वह अपनी प्रबल कामुकता को नहीं संभाल सकी। उसकी कामवासना एक मदमस्त हाथी के समान थी, इसलिए उसकी कामना को पूरा करके उसकी रक्षा करना उसके पति का परम कर्तव्य था।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥