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bhagavat 3.14.1: श्री शुकदेव गोस्वामी ने कहा: महामुनि मैत्रेय से भगवान के वराह रूप में अवतार के विषय में सुनकर दृढ़संकल्प विदुर ने हाथ जोड़कर उनसे भगवान के अन्य दिव्य कार्यों के बारे में सुनाने का अनुरोध किया, क्योंकि वे (विदुर) अभी भी संतुष्ट अनुभव नहीं कर रहे थे।   |   bhagavat अध्याय 3.14: संध्या समय दिति का गर्भ-धारण   ।   bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 14: संध्या समय दिति का गर्भ-धारण  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.14.1 
श्रीशुक उवाच
निशम्य कौषारविणोपवर्णितां
हरे: कथां कारणसूकरात्मन: ।
पुन: स पप्रच्छ तमुद्यताञ्जलि-
र्न चातितृप्तो विदुरो धृतव्रत: ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
श्री शुकदेव गोस्वामी ने कहा: महामुनि मैत्रेय से भगवान के वराह रूप में अवतार के विषय में सुनकर दृढ़संकल्प विदुर ने हाथ जोड़कर उनसे भगवान के अन्य दिव्य कार्यों के बारे में सुनाने का अनुरोध किया, क्योंकि वे (विदुर) अभी भी संतुष्ट अनुभव नहीं कर रहे थे।
 
Sukadeva Goswami said: Having heard from Maharshi Maitreya about the Lord's incarnation as Varaha, the determined Vidura with folded hands requested him to tell him about the next transcendental acts of the Lord, as he (Vidura) still did not feel satisfied.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)