त्वमेक: सर्वभूतानां जन्मकृद् वृत्तिद: पिता ।
तथापि न: प्रजानां ते शुश्रूषा केन वा भवेत् ॥ ७ ॥
अनुवाद
आप सभी जीवों के पिता तथा उनकी जीवनशैली के साधन हैं, क्योंकि उन सभी का जन्म आपसे ही हुआ है। कृपा करके हमें आज्ञा दें कि हम आपकी सेवा किस प्रकार कर सकते हैं।
You are the father of all living entities and the source of their sustenance, since they all have originated from You. Kindly instruct us as to how we may serve You.
तात्पर्य
एक पुत्र का कर्तव्य केवल पिता से अपनी जरूरतों की पूर्ति कराना ही नहीं है, बल्कि जब वह बड़ा हो जाए, तो उसकी सेवा करना भी है। यह ब्रह्मा के समय से ही सृष्टि का नियम रहा है। एक पिता का कर्तव्य है कि वह अपने पुत्र को तब तक पालन-पोषण करे, जब तक कि वह बड़ा न हो जाए, और जब पुत्र बड़ा हो जाए, तो उसकी सेवा करना उसका कर्तव्य है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥