क: श्रद्दधीतान्यतमस्तव प्रभो
रसां गताया भुव उद्विबर्हणम् ।
न विस्मयोऽसौ त्वयि विश्वविस्मये
यो माययेदं ससृजेऽतिविस्मयम् ॥ ४३ ॥
अनुवाद
हे परम पुरुषोत्तम भगवान, आपके अलावा ऐसा कौन है जो समुद्र के अंदर से पृथ्वी को बचा सकता है? लेकिन यह आपके लिए कोई बहुत बड़ी बात नहीं है, क्योंकि ब्रह्मांड के निर्माण में आपने सबसे अद्भुत कार्य किया है। अपनी शक्ति से आपने इस अद्भुत ब्रह्मांड की रचना की है।
O Supreme Personality of Godhead, who else other than You can rescue the earth from within the water? But this is not very surprising to You, because You have done a most wonderful work in creating the universe. By Your energy You have created this wonderful vast universe.
तात्पर्य
जब कोई वैज्ञानिक किसी अज्ञानी जनसमूह के लिए कुछ प्रभावशाली खोज करता है, तो सामान्य व्यक्ति बिना किसी जाँच पड़ताल के ऐसी खोज को अद्भुत के रूप में स्वीकार कर लेता है। परंतु बुद्धिमान व्यक्ति ऐसी खोजों से चकित नहीं होता है। वह सारा श्रेय उस व्यक्ति को देता है जिसने वैज्ञानिक का अद्भुत मस्तिष्क बनाया। एक सामान्य व्यक्ति भौतिक प्रकृति के अद्भुत कार्यों से भी चकित रह जाता है, और वह सभी श्रेय ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति को देता है। हालाँकि, कृष्ण-भावना से ओतप्रोत विद्वान व्यक्ति अच्छी तरह से जानता है कि ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति के पीछे कृष्ण का मस्तिष्क है, जैसा कि भगवद्-गीता (9.10) में पुष्टि की गई है: मयाध्यक्षेण प्रकृतिः सूयते स-चराचरम्। चूँकि कृष्ण अद्भुत ब्रह्माण्डीय अभिव्यक्ति को निर्देशित कर सकते हैं, इसलिए उनके लिए सूअर के विशाल रूप को धारण करना और इस प्रकार पृथ्वी को पानी के कीचड़ से मुक्त करना बिल्कुल भी आश्चर्यजनक नहीं है। इसलिए एक भक्त अद्भुत सूअर को देखकर चकित नहीं होता है क्योंकि वह जानता है कि भगवान अपनी शक्तियों द्वारा कहीं अधिक अद्भुत ढंग से कार्य करने में सक्षम हैं, जो कि सबसे अधिक विद्वान वैज्ञानिक के मस्तिष्क के लिए भी अकल्पनीय हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥