वे लोग जिन्होंने गुरु से परिश्रमपूर्वक और लंबे समय तक श्रवण किया है, उन्हें शुद्ध भक्तों के स्वभाव और कार्यों के बारे में शुद्ध भक्तों से ही सुनना चाहिए। शुद्ध भक्त अपने हृदय में हमेशा उन भगवान के चरणकमलों का चिंतन करते हैं जो अपने भक्तों को मोक्ष प्रदान करते हैं।
Those who listen to the Guru with great effort and for a long time should hear about the character and activities of pure devotees from the mouth of pure devotees only. Pure devotees always meditate within their hearts on the lotus feet of the Lord, who is the bestower of salvation to His devotees.
तात्पर्य
अनुवैदिक छात्र वे होते हैं जो यथार्थ आध्यात्मिक गुरु द्वारा वेद सुनकर प्रशिक्षित होने के लिए महान् तप करते हैं। न केवल उन्हें प्रभु की गतिविधियों के बारे में सुनना चाहिए, बल्कि उन्हें उन भक्तों के पारलौकिक गुणों के बारे में भी सुनना चाहिए जो निरंतर अपने दिलों में प्रभु के चरण कमलों के बारे में सोचते हैं। प्रभु का शुद्ध भक्त प्रभु के चरण कमलों से एक पल के लिए अलग नहीं हो सकता। निस्संदेह प्रभु सभी जीवों के दिलों में सदैव रहते हैं, परन्तु विलक्षण भौतिक ऊर्जा द्वारा भ्रमित होने के कारण उन्हें इसके बारे में शायद ही कुछ पता हो। परन्तु भक्त प्रभु की उपस्थिति का अनुभव करते हैं, और इसलिए वे अपने हृदयों में प्रभु के चरण कमलों को हमेशा देख सकते हैं। प्रभु के ऐसे शुद्ध भक्त प्रभु की तरह ही गौरवशाली होते हैं; वास्तव में, वे प्रभु द्वारा स्वयं से भी अधिक पूजनीय बताए गए हैं। भक्त की पूजा प्रभु की पूजा से अधिक प्रभावशाली है। इसलिए यह अनुवैदिक छात्रों का कर्तव्य है कि वे प्रभु के समान भक्तों द्वारा समझाए अनुसार शुद्ध भक्तों के बारे में सुनें, क्योंकि कोई भी प्रभु या उनके भक्त के बारे में नहीं बता सकता जब तक कि स्वयं शुद्ध भक्त न हो।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥