हे प्रभु, आपका वीर्य सोम यज्ञ है। आपकी वृद्धि प्रात:काल के कर्मकांड हैं। आपकी त्वचा और स्पर्श अनुभूति अग्निष्टोम यज्ञ के सात तत्व हैं। आपके शरीर के जोड़ बारह दिनों तक किए जाने वाले विविध यज्ञों के प्रतीक हैं। अतः आप सोम और असोम नामक सभी यज्ञों का लक्ष्य हैं और आप केवल यज्ञों से बंधे हुए हैं।
O Lord, Your semen is the sacrifice called Soma. Your growth is the ritualistic rites performed in the morning. Your skin and tactile sensation are the seven elements of the Agnishtoma sacrifice. The joints of Your body symbolize the various sacrifices performed over twelve days. Therefore, You are the object of all sacrifices called Soma and Asoma and You are bound by sacrifices alone.
तात्पर्य
वैदिक कर्मकांड वाले सभी सात प्रकार के यज्ञों का अनुष्ठान और वो यज्ञ कहलाते हैं अग्निष्टोम, अतिरात्र सात प्रकार के यज्ञों का अनुष्ठान करते हैं जो भगवान के पास रहते हैं। परंतु जो कोई भी भगवद्भक्त होता है अर्थात् भगवद्भक्ति में लगा रहता है और परम भगवान के संपर्क में आ जाता है वह सभी प्रकार के यज्ञों का अनुष्ठान कर चुका माना जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥