सारे ऋषि अत्यधिक श्रद्धा के साथ बोलने लगे कि हे अजेय यज्ञभोक्ता, आपकी जय हो। आप साक्षात् वेदों के रूप में विचरण कर रहे हैं और आपके शरीर के रोम छिद्रों में सारे सागर समाये हुए हैं। आपने किन्हीं कारणों से (पृथ्वी का उद्धार करने के लिए) अब सूअर का रूप धारण कर लिया है।
All the sages spoke with great respect, “Oh invincible enjoyer of all sacrifices, victory to you, victory to you, you are roaming in the form of the Vedas themselves and all the oceans are contained in the pores of your body. For some reason (to save the earth) you have now assumed the form of a boar.
तात्पर्य
भगवान् अपने इच्छानुसार किसी भी रूप में अवतरित हो सकते हैं और हर परिस्थिति में वे सभी कारणों के कारण हैं। क्योंकि उनका स्वरूप पारलौकिक है, इसलिए वे हमेशा सर्वोच्च भगवान होते हैं, जैसे वे कारण सागर में महाविष्णु के रूप में हैं। उनके शरीर के रोमकूपों के छिद्रों से असंख्य ब्रह्मांड उत्पन्न होते हैं, और इस तरह उनका पारलौकिक शरीर वेदों का प्रतिनिधित्व करता है। वे सभी यज्ञों का भोग करने वाले हैं, और वे अजेय सर्वोच्च भगवान हैं। उन्हें कभी भी पृथ्वी को उठाने के लिए सूअर का रूप धारण करने के कारण सर्वोच्च भगवान के अलावा कुछ नहीं समझा जाना चाहिए। यह ब्रह्मा और उच्च ग्रह प्रणालियों के अन्य निवासियों जैसे ऋषियों और महान व्यक्तित्वों की स्पष्ट समझ है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥