पाताल-मूलेश्वर-भोग-संहतौ
विन्यस्य पादौ पृथ्वीं च बिभ्रतः
यस्योपमानो न बभूव सोऽच्युतो
ममास्तु मांगल्य-विवृद्धये हरिः
अतएव प्रभु ने पृथ्वी को गभ्रोदक सागर के निचले हिस्से में पाया, जहाँ ब्रह्मा के एक दिन के अंत में प्रलय के दौरान ग्रह विश्राम करते हैं।
