श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 13: वराह भगवान् का प्राकट्य  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.13.24 
ब्रह्माणं हर्षयामास हरिस्तांश्च द्विजोत्तमान् ।
स्वगर्जितेन ककुभ: प्रतिस्वनयता विभु: ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
असाधारण स्वर मे फिर से गर्जन करके सर्वशक्तिमान भगवान ने ब्रह्मा और अन्य श्रेष्ठ ब्राह्मणों में एक बार फिर से प्राण डाले, जिससे सारी दिशाएँ गूंज उठीं।
 
The almighty Lord again revived Brahma and the other exalted brahmanas by roaring with his extraordinary voice so loud that it resounded in all directions.
तात्पर्य
ब्रह्मा और दूसरे ज्ञानी ब्राह्मण जो परमेश्वर को जानते हैं, भगवान के विभिन्न अवतारों को देखकर उत्साहित हो जाते हैं। भगवान विष्णु के पहाड़ जैसे विशाल सूअर रूपी अवतार की उपस्तिथि से उन्हें कोई भय नहीं था, भले ही वे अपने खूंखार रूप में गरज रहे थे और सभी दिशाओं में उनके शब्द गूँज रहे थे और सभी राक्षसों को चुनौती दे रहे थे जो उनकी सर्वव्यापकता को चुनौती दे सकते थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)