इति मीमांसतस्तस्य ब्रह्मण: सह सूनुभि: ।
भगवान् यज्ञपुरुषो जगर्जागेन्द्रसन्निभ: ॥ २३ ॥
अनुवाद
जब ब्रह्माजी अपने पुत्रों के साथ विचार-विमर्श कर रहे थे, तो भगवान विष्णु ने पर्वतों जैसी गम्भीर गरज के साथ प्रकट होकर अपने क्रोध को ध्वनि रूप दिया।
When Brahma was conferring with his sons, the Supreme Lord Vishnu roared as loud as a huge mountain.
तात्पर्य
ऐसा प्रतीत होता है कि विशाल पहाड़ियाँ और पर्वतों में भी गर्जना करने की शक्ति है, क्योंकि वे भी जीवित प्राणी हैं। ध्वनि की प्रबलता उस भौतिक शरीर के आकार के अनुपात में होती है। जब ब्रह्मा भगवान के वराह अवतार की उपस्थिति के बारे में अनुमान लगा रहा था, तब भगवान ने अपनी आकर्षक आवाज से गर्जना करके ब्रह्मा के चिंतन की पुष्टि की।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥