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bhagavat 3.13.21: क्या यह सूअर के बहाने कोई असामान्य प्राणी है? यह बहुत ही आश्चर्य की बात है कि वह मेरी नाक से बाहर आया है।   |   bhagavat अध्याय 3.13: वराह भगवान् का प्राकट्य   ।   bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 13: वराह भगवान् का प्राकट्य  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.13.21 
किमेतत्सूकरव्याजं सत्त्वं दिव्यमवस्थितम् ।
अहो बताश्चर्यमिदं नासाया मे विनि:सृतम् ॥ २१ ॥
 
 
अनुवाद
क्या यह सूअर के बहाने कोई असामान्य प्राणी है? यह बहुत ही आश्चर्य की बात है कि वह मेरी नाक से बाहर आया है।
 
Has this unusual personality come from the guise of a pig? It is most surprising that he came out of my nose.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)