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bhagavat 3.13.20: आकाश में अद्भुत सूअर के जैसे रूप को देखकर विस्मित ब्रह्माजी महर्षि मरीचि जैसे ब्राह्मणों, चार कुमारों और मनु के साथ मिलकर तरह-तरह के तर्क करने लगे।   |   bhagavat अध्याय 3.13: वराह भगवान् का प्राकट्य   ।   bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 13: वराह भगवान् का प्राकट्य  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.13.20 
मरीचिप्रमुखैर्विप्रै: कुमारैर्मनुना सह ।
हृष्ट्वा तत्सौकरं रूपं तर्कयामास चित्रधा ॥ २० ॥
 
 
अनुवाद
आकाश में अद्भुत सूअर के जैसे रूप को देखकर विस्मित ब्रह्माजी महर्षि मरीचि जैसे ब्राह्मणों, चार कुमारों और मनु के साथ मिलकर तरह-तरह के तर्क करने लगे।
 
Astonished at seeing the wonderful boar-like form in the sky, Brahmaji began to argue in various ways with great Brahmins like Marichi, the four Kumaras and Manu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)